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फूलों जैसी कली है बेटी

प्रियंका कोशियारी

फूलों जैसी कली है बेटी

कपकोटउत्तराखंड


फूलों जैसी कली है बेटी।

तितली जैसी उड़ान है उसकी।

कर सकती है वो भी सबकुछ।

अपने पिता की शान है वो।

मेहंदी के रंग के बदले।

हाथों में होगी कलम उसके।।

ना बांधो यूं ज़ंजीरों में उसको।

तोड़ दो सारे बंधन उसके।।

साक्षरता का दीप जलाकर।

अंधियारा वह दूर भगाएगी।।

न समझो यूँ बोझ उसे।

मेहनत कर कुछ दिखलाएगी वो।।

मत छीनो गर्भ में उसका आकार।

उसे भी देखने दो यह संसार।।

रोको ना तुम उसे किसी राह पे।

हो ना पायेगी फिर वो पार।।

दिखलाती ना दुख वो अपने।

मगर ना समझो उसे कमजोर।

सपने कर सकती है वो भी सच।

राहें ले सकती है वह भी मोड़।।

पंछी जैसे उड़ना है उसको भी।

ना करो पिंजरे में उसको बंद।।

गाथा वह अपनी बतलाएगी।

जग में भरेगी वह सारे रंग।।

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वे दिन थे मेरे लिए बेहद खास


करीना थायत

फूलों जैसी कली है बेटी

कक्षा-9

गरुड़उत्तराखंड


वे भी दिन थे मेरे लिए बेहद खास।

जब खेलने का था मुझको अहसास।।

अब तो जिंदगी से है यही आस।

दोबारा खेलने का मौका आए मेरे पास।।

न थी चिंतान थी कोई फिक्र।

बस याद आ रहे हैं खेलकूद के दिन।

जब खेलते हैं बच्चे सारे दिन।

याद आते हैं मुझ को भी वो दिन।।

जब दोस्तों से खूब लड़ा करते थे।

और अक्ल से थोड़े कच्चे थे।।

फिर भी खेलने के इच्छुक रहते थे।

आज भी खेलने को दिल मचलता है।

बचपन में लौट जाने को तड़पता है।।

आज अगर फिर से मिल जाए एक मौका।

हम भी लगा सकते हैं चौके पे चौका।।

चरखा फीचर


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